सीबीएसई के पूर्व संयुक्त सचिव डॉ.रणबीर सिंह वीआरएस के बाद इन दिनों उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में शिक्षा की अलख जगाने में जुट गये हैं। उन्होंने सुदूरवर्ती चकराता से लेकर पहाड़ी क्षेत्रों में गरीब बच्चों की शिक्षा में बाकी जीवन लगाने का फैसला ले लिया है।
आइए जानते हैं कौन हैं डॉ.रणबीर सिंह और आखिर क्यों उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन वंचितों की शिक्षा में समर्पित कर दिया है।
मूल रूप से उत्तराखण्ड देवभूमि के सुदूर ग्रामीण जनजातीय क्षेत्र जौनसार बाबर के ग्राम कोरुवा, तहसील चकराता जनपद देहरादून के स्थाई निवासी डॉ.रणबीर सिंह ने कक्षा 12वीं तक की शिक्षा ग्रामीण परिक्षेत्रीय व्यवस्था में प्राप्त की। सर्वप्रथम भारतीय स्टेट बैंक की सेवा, फिर केंद्रीय आयुर्वेद संस्थान झाँसी उसके बाद केंद्रीय पादुका प्रशिक्षण संस्थान आगरा में कार्य करने के उपरांत वर्ष 2002 में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सी.बी.एस.ई.) के क्षेत्रीय कार्यालय इलाहाबाद में उन्होंने सेवा दी। यहां से उनका सफर प्रयागराज में अधीक्षक के पद पर पहुंचा। दिनांक 24.06.2002 से दिनांक 31.03.2014 तक वो इलाहाबाद में रहे। उसके बाद उत्तराखण्ड के लिए नवसृजित केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून ज्वाइन किया और फिर फरवरी 2015 में मुख्यालय में विशेष कार्य हेतु 8 महीने के लिए पोस्टिंग रही, वापिस देहरादून आने पर सितम्बर 2021 से क्षेत्रीय प्रमुख का कार्यभार देखा। उत्तरदायित्वों की निरंतरता सितम्बर 2021 तक रही उसके बाद बैंगलोर कार्यालय स्थानांतरित हुये और फिर 1 वर्ष बाद बैंगलोर से देहरादून और जनवरी 2024 में देहरादून से दिल्ली मुख्यालय भेजे गये।